सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization): UPPET व शिक्षक भर्ती (CTET, TGT/PGT, KVS) हेतु संपूर्ण स्टडी नोट्स

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) 

यह लेख UPPET 2026 और तमाम शिक्षण परीक्षाओं (Teacher Exams) जैसे CTET, UP-TGT/PGT, KVS, DSSSB और राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के इतिहास पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को व्यवस्थित किया गया है।

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization): UPPET व शिक्षक भर्ती (CTET, TGT/PGT, KVS) हेतु संपूर्ण स्टडी नोट्स


1. सामान्य परिचय एवं खोज (General Introduction & Discovery)

• प्राचीनता: सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की चार प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक है। इसे भारत की प्रथम नगरीय क्रांति या प्रथम शहरीकरण तथा 'कांस्य युगीन सभ्यता' (Bronze Age Civilization) माना जाता है।

• कालक्रम: रेडियोकार्बन तिथि (C-14) के अनुसार इसका प्रामाणिक काल 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना जाता है।

• क्षेत्रफल एवं आकार: इस सभ्यता का संपूर्ण क्षेत्रफल लगभग 12,99,600 वर्ग किमी तथा भौगोलिक आकार 'त्रिभुजाकार' (Triangular) था।

महत्वपूर्ण खोज एवं तिथियाँ:

1826: सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन ने हड़प्पा के टीलों का उल्लेख किया।

1856: कराची से लाहौर रेल पटरी बिछाते समय बर्टन बंधुओं ने हड़प्पा की ईंटों का उपयोग किया।

1861: अलेक्जेंडर कनिंघम के नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना हुई। कनिंघम को 'भारतीय पुरातत्व का जनक' कहा जाता है।

1921: रायबहादुर दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा की खोज।

1922: राखालदास बनर्जी द्वारा मोहनजोदड़ो की खोज।

1924: सर जॉन मार्शल ने 'इलास्ट्रेटेड लंदन न्यूज़' में इस सभ्यता की आधिकारिक घोषणा की।

भौगोलिक सीमाएँ:

उत्तरी स्थल: मांडा (जम्मू-कश्मीर, चिनाब नदी)

दक्षिणी स्थल: दैमाबाद (महाराष्ट्र, प्रवरा नदी)

पूर्वी स्थल: आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश, हिंडन नदी)

पश्चिमी स्थल: सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, दश्क नदी)

अन्य नाम: ऋग्वेद में हड़प्पा सभ्यता को 'हरियूपिया' तथा मेसोपोटामिया के अभिलेखों में इसके लिए 'मेलुहा' शब्द का प्रयोग किया गया है। स्टुअर्ट पिगॉट ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को एक जुड़वां राजधानी बताया है।

2. नगर नियोजन एवं वास्तुकला (Town Planning & Architecture)

ग्रिड पद्धति: सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं, जिसे 'ग्रिड पद्धति' या 'ऑक्सफोर्ड सर्कस' कहा जाता था।

नगर विभाजन: नगर मुख्य रूप से पश्चिमी दुर्ग (Citadel) और निचला नगर में विभाजित थे। धौलावीरा एकमात्र ऐसा नगर था जो तीन भागों (दुर्ग, मध्य नगर और निचला नगर) में विभाजित था।

ईंटों का अनुपात: मकान बनाने के लिए पक्की ईंटों का प्रयोग होता था, जिनका मानक आकार 4 : 2 : 1 था।

जल निकास प्रणाली: घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए ढकी हुई नालियों की उत्कृष्ट व्यवस्था थी, जिन्हें साफ करने के लिए 'मैनहोल' बनाए जाते थे। लकड़ी की नाली के साक्ष्य केवल 'कालीबंगा' से मिले हैं।

प्रमुख संरचनाएं:

मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार (Great Bath): मार्शल ने इसे 'विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण' कहा।

अन्न भंडार: मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत विशाल अन्न भंडार थी, जबकि हड़प्पा से 6-6 की दो पंक्तियों में बने 12 अन्न भंडार मिले हैं।

चन्हुदड़ो: यह एकमात्र ऐसा नगर था जिसमें दुर्ग के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

लोथल: यहाँ मकानों के दरवाजे मुख्य सड़क पर खुलते थे (अन्य नगरों में पीछे की गलियों में खुलते थे)।

समाज, धर्म एवं संस्कृति (Society, Religion & Culture)

सामाजिक ढांचा: सिंधु घाटी समाज मुख्य रूप से 'मातृसत्तात्मक' (Matriarchal) था। सर्वाधिक संख्या में मातृदेवी की मृण्मूर्तियां मिली हैं।

धार्मिक मान्यताएं:

मोहनजोदड़ो से पशुपति नाथ (आदि-शिव) की मुहर मिली है जिस पर हाथी, बाघ, गेंडा, भैंसा और दो हिरण अंकित हैं।

सिंधुवासी कुबड़ वाले बैल और 'एकश्रृंगी' (Unicorn) पशु को पवित्र मानते थे।

पीपल, नीम और बरगद जैसे वृक्षों की पूजा की जाती थी।

इस सभ्यता में किसी भी 'मंदिर' के अवशेष नहीं मिले हैं।

स्वास्तिक चिह्न इसी सभ्यता की देन है, जिससे सूर्य उपासना का अनुमान लगाया जाता है।

कला एवं सौंदर्य:

मोहनजोदड़ो से 'कांस्य की नर्तकी' की मूर्ति 'लुप्त मोम विधि' (Lost-wax casting) से बनाई गई प्राप्त हुई है।

चन्हुदड़ो से सौंदर्य प्रसाधन सामग्री (जैसे लिपस्टिक, काजल) के साक्ष्य मिले हैं।

कृषि एवं पशुपालन (Agriculture & Animal Husbandry)

आर्थिक आधार: सिंधुवासियों का मुख्य आर्थिक आधार कृषि था। मुख्य खाद्य फसलें गेहूँ और जौ थीं।

कपास की शुरुआत: विश्व में सर्वप्रथम 'कपास' की खेती सिंधु वासियों ने शुरू की, जिसे यूनानियों ने 'सिंडन' (Sindon) कहा।

कृषि साक्ष्य:

कालीबंगा: जुते हुए खेत और एक साथ दो फसलें उगाने के साक्ष्य।

लोथल और रंगपुर: चावल की भूसी के साक्ष्य।

बनवाली: मिट्टी के बने हल (खिलौना) का प्रारूप।

शोर्तुघई (अफगानिस्तान): नहरों के साक्ष्य।

पशुपालन: बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सूअर और कुत्ता प्रमुख पालतू पशु थे। 'कुबड़ वाला सांड' सबसे प्रिय पशु था। सुरकोटदा से घोड़े की हड्डियों के अवशेष मिले हैं।


उद्योग, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था (Industry, Trade & Economy)

व्यापार प्रणाली: व्यापार में सिक्कों का चलन नहीं था, बल्कि 'वस्तु-विनिमय प्रणाली' (Barter System) प्रचलित थी।

बंदरगाह: 'लोथल' सिंधु सभ्यता का सबसे प्रमुख और पहला मानव निर्मित बंदरगाह (Dockyard) था। सुत्कागेंडोर और बालाकोट भी प्रमुख तटीय बंदरगाह थे।

आयातित वस्तुएं:

तांबा: खेतड़ी (राजस्थान) और ओमान से।

चाँदी व टिन: अफगानिस्तान और ईरान से।

सोना: दक्षिण भारत (कोलार) और अफगानिस्तान से।

नापतौल प्रणाली: वजन/माप प्रणाली 'दशमलव' और '16 के गुणज' (16, 32, 64 आदि) पर आधारित थी। बाट चर्ट (Chert) नामक पत्थर से बनाए जाते थे।


लिपि, कला एवं मोहरें (Script, Art & Seals)

लिपि: सिंधु सभ्यता की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी जिसमें लगभग 375-400 चिन्ह हैं। इसे दाएं से बाएं तथा बाएं से दाएं लिखा जाता था, जिसे 'बूस्ट्रोफेडन' (Boustrophedon) कहा जाता है। यह लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।

मोहरें (Seals): मुहरें मुख्य रूप से 'सेलखड़ी' (Steatite) पत्थर से वर्गाकार बनाई जाती थीं, जिनपर सबसे अधिक 'एकश्रृंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है। मुहरों पर गाय और घोड़े का चित्र बिल्कुल नहीं मिलता है।

टेराकोटा: मिट्टी की बनी मूर्तियों को टेराकोटा कहा जाता है।

प्रमुख स्थल, उत्खननकर्ता एवं नदियाँ (Important Sites & Rivers)

स्थल (Site)     नदी (River)  खोजकर्ता / उत्खननकर्ता     वर्तमान स्थिति (Location)

हड़प्पा             रावी                 दयाराम साहनी (1921)             साहीवाल, पंजाब (पाकिस्तान)

मोहनजोदड़ो     सिंधु                 राखालदास बनर्जी (1922)             लरकाना, सिंध (पाकिस्तान)

कालीबंगा             घग्घर                 अमलानंद घोष (1953)             हनुमानगढ़, राजस्थान

लोथल             भोगवा                 एस.आर. राव (1954)                     अहमदाबाद, गुजरात

चन्हुदड़ो             सिंधु                 एन.जी. मजूमदार (1931)             सिंध, पाकिस्तान

धौलावीरा             लूनी                 आर.एस. बिष्ट                             कच्छ, गुजरात

रोपड़             सतलुज                 यज्ञदत्त शर्मा (1953-55)             पंजाब, भारत

आलमगीरपुर     हिंडन                 यज्ञदत्त शर्मा                             मेरठ, उत्तर प्रदेश

राखीगढ़ी             घग्घर                    अमरेंद्र नाथ                     हिसार, हरियाणा (भारत का सबसे बड़ा स्थल)

विज्ञान, तकनीक एवं पतन (Science, Technology & Decline)

लोहे से अनभिज्ञता: सिंधु सभ्यता के लोग 'लोहे' (Iron) की धातु से पूर्णतः अनजान थे। यह पूर्णतः कांस्य-युगीन सभ्यता थी।

शल्य चिकित्सा: 'कालीबंगा' से प्राप्त खोपड़ी के साक्ष्य से शल्य चिकित्सा (Trephination) का पता चलता है।

पतन के कारण:

बाढ़: मैके और जॉन मार्शल (सर्वाधिक सर्वमान्य कारण)।

जलवायु परिवर्तन/सूखा: ऑरेल स्टाइन और अमलानंद घोष।

आर्यों का आक्रमण: गॉर्डन चाइल्ड और व्हीलर।

नदियों का मार्ग बदलना: एच.टी. लैम्ब्रिक।